why-maa-is-not-just-a-word-its-a-world/  माँ — वो दुआ जो बिना कहे कुबूल हो जाती है।"

माँ वो नहीं जो बस दिखे, माँ वो भी है जो अपने भीतर एक ज़िंदगी पाल रही है — हर धड़कन में ममता बुन रही है।"

जब उसने पहली बार अपनी बाहों में लिया, तब पूरी दुनिया सिमट गई उसकी ममता में।"

स्कूल प्रोजेक्ट से लेकर ज़िंदगी के फैसलों तक, माँ हमेशा साथ खड़ी रही।"

जब मैं चलना सीख रहा था, वो थामे रही… आज जब वो थक कर रुकती है, मेरा फर्ज़ है उसे थामना।

वो माँ ही होती है, जो अपने हिस्से की खुशियाँ भी हमारे नाम लिख देती है , "माँ जन्नत होती है।"